बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए रहें सतर्क


-सर्दी से बचाएं, बाहर ले जाते वक्त गर्म कपड़े जरूर पहनाएं

-बच्चे में लक्षण दिखाई पड़े तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें

बांका, 16 दिसंबर।

सर्दी का मौसम शुरू हो गया है। तापमान लगातार नीचे गिरता जा रहा है। ऐसे मौसम में बीमारियों से बचे रहने की जरूरत होती है। खासकर बच्चों को निमोनिया न हो, इसे लेकर खासा सतर्क रहना चाहिए। हालांकि सिर्फ सर्दी के ही मौसम में ही निमोनिया नहीं होता है। यह आम दिनों में भी होता है, लेकिन सर्दी के मौसम इसके होने की ज्यादा संभावना रहती है। इसी तरह यह बीमारी किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है, लेकिन बुजुर्गों और बच्चों में इसके होने की संभावना अधिक रहती है। विशेषकर बच्चों को बचाने के लिए इसे लेकर सावधान रहना जरूरी हो जाता है। इसलिए ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर बच्चों को कैसे रखें, जिससे कि वह निमोनिया की चपेट में नहीं आए।

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इस वजह से उनके बीमार होने का खतरा अधिक रहता है। बच्चों की सेहत का अगर ध्यान ठीक से नहीं रखा जाए तो वह सर्दी के मौसम में निमोनिया की चपेट में भी आ सकता है। निमोनिया सांस से जुड़ी बीमारी है जो आमतौर पर दो सप्ताह में ठीक हो जाती है। यह सांस से जुड़ी गंभीर बीमारी है जो आमतौर पर वायरल से होता है। मौसम बदलने के कारण सर्दी लगने से यह बीमारी होती है। सर्दी के मौसम में यह बीमारी ज्यादा परेशान करती है, इसलिए अगर किसी के बच्चे में निमोनिया के लक्षण दिखे तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। 

ये हैं लक्षणः डॉ. चौधरी कहते हैं कि तेज बुखार, तेज सांस चलना, बढ़ती सर्दी और खांसी और छाती का अंदर धंसना। अगर किसी के बच्चे में यह लक्षण दिखे तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इलाज में देरी खतरनाक हो सकता है। नवजात शिशुओं में निमोनिया के संक्रमण का कोई भी लक्षण जल्दी नजर नहीं आता है, इसलिए अगर सर्दी, खांसी, बुखार और सांस तेज चलने की शिकायत हो तो उसे तत्काल डॉक्टर से दिखाएं। डॉक्टर निमोनिया के लक्षण एक्सरे और सिटी स्कैन से भी पता लगा सकते हैं।  

बचाव के हैं ये उपायः डॉ चौधरी कहते हैं कि बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए सबसे जरूरी है, उसका टीकाकरण कराना। इसके अलावा आहार में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली चीजों को शामिल करना। अगर रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है तो बच्चे इससे बचा रहता है। इसके अलावा साफ-सफाई का भी ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। बच्चे को छूने से पहले हाथ की सफाई जरूरी है। इससे वह संक्रमण से मुक्त रहता है। बच्चे को गर्म कपड़े पहनाएं। बाहर ले जाते वक्त इस बात का विशेष ध्यान रखें। बच्चे की छाती और सिर पर हवा नहीं लगने दें। ठंडा पानी देने से परहेज करें। बच्चे की नींद पूरी हो, इस बात का ध्यान रखें।

रिपोर्टर

  • Dr. Rajesh Kumar
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